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एच॰आई॰एल॰, भारत सरकार का उद्यम, रसायन और उर्वरक मंत्रालय, रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग, भारत सरकार के नियंत्रणाधीन है तथा इसकी स्थापना मार्च १९५४ में भारत सरकार द्धारा आरम्भ किए गए राष्ट्रीय मलेरिया रोधी कार्यक्रम मे लिए डीडीटी की आपूर्ति के लिए की गई। बाद में कंपनी कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एग्रो-पैस्टिसाइड्स में विविधता लाई और वर्ष २००५-०६ में मिलियन रू॰ की बिक्री करके बहुमुखी रूप से विकसित हुई। कम्पनी जन-स्वास्थ्य एवं पादप संरक्षण के लिए सुरक्षित और पर्यावरणीय अनुकूल वनस्पतिक तथा बायो-पैस्टिसाइड्स के क्षेत्र में प्रवेश किया। इसके उत्पादों में कीटनाशी, शाकनाशी, अपतृणनाशी, फंगसनाशी इत्यादि उत्पाद सम्मिलित हैं। उद्योग-घरों और कार्यालयों की आवश्यकताओं को पूरा करन के लिए एक पैस्अ नियंत्रण है।
मलेरिया के विरूद्ध एक लागत प्रभावी तथा दक्ष साधन के रूप में डीडीटी पर बिन्दु के साथ कंपनी ने मुख्यतः अफ्रीकन देशों के साथ डीडीटी ७५ः डब्ल्यूडीपी का निर्यात करने का साहसिक कार्य किया। यू०एस० से डीडीटी के प्रापण के लिए पुनः प्रारम्भिक सहायता तथा छिडकाव के लिए डीडीटी के प्रयोग के लिए पूर्ण समर्थन के साथ कम्पनी विश्व में डीडीटी के मुख्य आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरकर विशाल कार्य क्षेत्र देखती है, क्योंकि एच०आई०एल० विश्व की सबसे बडी डीडीटी उत्जादक है। इसके अतिरिक्त कंपनी का डीडीटी के विनिर्माणन में ५० वर्ष से अधिक अनुभव तथा निपुणता है।